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प्रिये दोस्तों यह सुनने में अजीब सा लगता लखपति , करोड़पति और करोड़पति लखपति कैसे बन सकता ह , लेकिन यह सत्य ह दोस्तों । यह दावा किया ह विश्व के जाने माने तांत्रिक , एस्ट्रोलोजर, रैकी ग्रैंड मास्टर, टैरो रीडर, पालमिस्ट, अंक ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार द्वारा, इनके अनुसार जिस घर में असली सिद्ध हत्थाजोडी, सियारसिंघि, श्वेतार्क गणपति, दक्षिणावर्ति शंख होता ह वे लोग दिन दुनी रात चोगोनि बरकत करते ह चाहे वे प्रॉपर्टी डीलर हो, अभिनेता हो या नेता, बिज़नेसमैन हो या ऑफिसवर्कर उनके भाग्य में ये चारो भगवान का अमृत और प्रकर्ति के वरदान चार चाँद लगा देंगे ।बाज़ारो से कम कीमत पर नकली , डुप्लीकेट हत्थाजोडी, सियारसिंघि, श्वेतार्क गणपति आदि खरीद कर लोग अपने घरो इन्हें रख तो लेते ह लेकिन बरकत के नाम पर ठेंगा मिलता ह, नकली बाजारू वस्तुओ के कारण लोगो का इन दिव्य वस्तुओ के प्रति आस्था कम होती जा रही ह, दोस्तों जिस घर में असली तांत्रिक रीती से सिद्ध किये हुयी हत्थाजोडी, सियारसिंघि, श्वेतार्क गणपति और दिव्य दक्षिणावर्ति शंख हो तो उसकी 21 पीढ़ियों में गरीबी नही आ सकती। हमारे संस्थान से ये दिव्य सिद्ध और असली चारो वस्तुए मात्र 21000/- में लोगो तक पहुचाई जा रही ह , एक बार इन्हें धारण करके देखे और पर्भु का चमत्कार अपने हाथो से देखे, दोस्तों यह सुनहरा अवसर ह ईन असली वस्तुओ को पाने का वरना ढूंढते रह जाओगे बाज़ारो और जंगलो में , आइये जानते ह इन चारो करामाती वस्तुओ के विषय में:------------------…..1.हत्था जोड़ी::-हत्था जोड़ी एक वनस्पति है. एक विशेष जाती का पौधे की जड़खोदने पर उसमे मानव भुजा जैसी दो शाखाये दिख पड़ती है, इसके सिरे पर पंजा जैसा बना होता है. उंगलियों के रूप में उस पंजे कीआकृति ठीक इस तरह की होती है जैसे कोई मुट्ठी बंधे हो. जड़निकलकर उसकी दोनों शाखाओ को मोड़कर परस्पर मिला देने सेकर बढ़ता की स्थिथि आती है, यही हत्था जोड़ी है. इसकी पौधेप्राय मध्य प्रदेश में होते है, जहा वनवासी जातियों की लोग इसेनिकलकर बेच दिया करते है.हत्था जोड़ी यह बहुत ही शक्तिशाली व प्रभावकारी वस्तु है यहएक जंगली पौधे की जड़ होती है मुकदमा , शत्रु संघर्ष , दरिद्रता , वदुर्लभ आदि के निवारण में इसके जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखनेमें नही आई इसमें वशीकरण को भी अदुभूत टकक्ति है , भूत दृप्रेतआदि का भय नही रहता यदि इसे तांत्रिक विधि से सिध्द करदिया जाए तो साधक निष्चित रूप से चामुण्डा देवी का कृपापात्र हो जाता है यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य मेंसफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारीसाबित हुई है तांत्रिक वस्तुओं में यह महत्वपूर्ण हैहत्था जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षातचामुंडा देवी का प्रतिरूप है. यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुतरुप से प्रभावशाली होगा. सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा मेंअत्यंत गुणकारी होता है, हत्था जोड़ी.होली की रात को कुंए के पास जाकर थोड़ी मिट्टी खोद करउसकी एक गणेशजी की मूर्ति बनाएं। उसके ऊपर सिंदूर से लेपन कररातभर उसका अभिषेक-पूजन करें। सुबह आरती के बाद विसर्जन करदें। इससे प्रयोग से भी शीघ्र ही धन लाभ होने लगता है।हत्था जोड़ी जो की एक महातंत्र में उपयोग में लायी जाती हैऔर इसके प्रभाव से शत्रु दमन तथा मुकदमो में विजय हासिल होतीहै !मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं फिर भी आपकोआर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आपकोअपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उपाय करना चाहिए। इसकेलिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घरलाएं। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान मेंअथवा तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्ययकम होगा।तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ मेंवृद्धि होने लगती है.हाथा जोड़ी एक जड़ है। होली के पूर्व इसको प्राप्त कर स्नानकराकर पूजा करें तत्पश्चात तिल्ली के तेल में डूबोकर रख दें। दोहफ्ते पश्चात निकालकर गायत्री मंत्र से पूजने के बाद इलायचीतथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में रख दें। इससेधन लाभ होता है।हाथा जोड़ी को इस मंत्र से सिद्ध करें-ऊँ किलि किलि स्वाहा।। 2.….कुदरत का करिश्मा श्वेतार्क गणपति::-शास्त्रों में श्वेतार्क के बारे में कहा गया है- “जहां कहीं भी यहपौधा अपने आप उग आता है, उसके आस-पास पुराना धन गड़ाहोता है। जिस घर में श्वेतार्क की जड़ रहेगी, वहां से दरिद्रता स्वयंपलायन कर जाएगी। इस प्रकार मदार का यह पौधा मनुष्य के लिएदेव कृपा, रक्षक एवं समृद्धिदाता है।सफेद मदार की जड़ में गणेशजी का वास होता है, कभी-कभीइसकी जड़ गणशेजी की आकृति ले लेती है। इसलिए सफेद मदार कीजड़ कहीं से भी प्राप्त करें और उसकी श्रीगणेश की प्रतिमाबनवा लें। उस पर लाल सिंदूर का लेप करके उसे लाल वस्त्र परस्थापित करें। यदि जड़ गणेशाकार नहीं है, तो किसी कारीगर सेआकृति बनवाई जा सकती है। शास्त्रों में मदार की जड़ की स्तुतिइस मंत्र से करने का विघान है-चतुर्भुज रक्ततनुंत्रिनेत्रं पाशाकुशौ मोदरक पात्र दन्तो।करैर्दधयानं सरसीरूहस्थं गणाधिनाभंराशि चूùडमीडे।।गणेशोपासना में साधक लाल वस्त्र, लाल आसान, लाल पुष्प, लालचंदन, मूंगा अथवा रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करें। नेवैद्य में गुड़ वमूंग के लड्डू अर्पित करें। “ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्” मंत्र का जप करें।श्रद्धा और भावना से की गई श्वेतार्क की पूजा का प्रभाव थोड़ेबहुत समय बाद आप स्वयं प्रत्यक्ष रू प से अनुभव करने लगेंगे।तन्त्र शास्त्र में श्वेतार्क गणपति की पूजा का विधान है | यह आमलक्ष्मी व गणपति की प्रतिमाओं से भिन्न होती है | यह प्रतिमाकिसी धातु अथवा पत्थर की नहीं बल्कि जंगल में पाये जाने वालेएक पोधे को श्वेत आक के नाम से जाना जाता है | इसकी जड़ कमसे कम २७ वर्ष से जयादा पुरानी हो उसमें स्वत: ही गणेश जी कीप्रतिमा बन जाती है | यह प्रक्रति का एक आश्चर्य ही है | श्वेतकआक की जड़ (मूल ) यदि खोदकर निकल दी जाये तो निचे की जड़में गणपति जी की प्रतिमा प्राप्त होगी | इस प्रतिमा का नित्यपूजन करने से साधक को धन-धान्य की प्राप्ति होती है | यहप्रतिमा स्वत: सिद्ध होती है | तन्त्र शास्त्रों के अनुसार ऐशे घर मेंयंहा यह प्रतिमा स्थापित हो , वंहा रिद्धी-सिद्ध तथाअन्नपूर्णा देवी वस् करती है | श्वेतार्क की प्रतिमा रिद्धी-सिद्धकी मालिक होती है | जिस व्यक्ति के घर में यह गणपति कीप्रतिमा स्थापित होगी उस घर में लक्ष्मी जी का निवास होताहै तथा जंहा यह प्रतिमा होगी उस स्थान में कोई भी शत्रु हानीनहीं पहुंचा सकता | इस प्रतिमा के सामने नित्य बैठकर गणपति जीका मूल मन्त्र जपने से गणपति जी के दर्शन होते हैं तथा उनकीक्रपा प्राप्त होती है |श्वेतक आक की गणपति की प्रतिमा अपने पूजा स्थान में पूर्वदिशा की तरफ ही स्थापित करें | ‘ ओम गं गणपतये नम:’ मन्त्र काप्रतिदिन जप करने | जप के लिए लाल रंग का आसन प्रयोग करें तथाश्वेत आक की जड़ की माला से यह जप करें तो जप कल में ही साधककी हर मनोकामना गणपति जी पूरी करते हैं |व्यापार स्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या हो तो वहांश्वेतार्क गणपति तथा की स्थापना करें।श्वेतक आक गणपति एक दुर्लभ प्रकतिक उपहारजंगल में पाये जाने वाले एक पोधे को सफेद आक के नाम से जानाजाता है | इसकी जड़ पुरानी हो तो उसमें स्वत: ही गणेश जी कीप्रतिमा बन जाती है | यह प्रक्रति का एक आश्चर्य ही है | श्वेतकआक की जड़ (मूल ) यदि खोदकर निकल दी जाये तो निचे की जड़में गणपति जी की प्रतिमा प्राप्त होगी | इस प्रतिमा का नित्यपूजन करने से साधक को धन-धान्य की प्राप्ति होती है | यहप्रतिमा स्वत: सिद्ध होती है | तन्त्र शास्त्रों के अनुसार ऐशे घर मेंयंहा यह प्रतिमा स्थापित हो , वंहा रिद्धी-सिद्ध तथाअन्नपूर्णा देवी वस् करती है , श्वेतक आक गणपति पूजन विधि:श्वेतक आक गणपति की प्रतिमा रवि पुष्य या गुरु पुष्य जैसे शुभमुहूर्त पर प्राप्त करके गंगा जल में स्नान करवा कर लाल संदुर कालेप करे , अब गणपति जी को पूर्व दिशा में लाल कपड़े पर हीस्थापित करें, उसके बाद गणपति पर षोडश उपचार से पूजन कर . इसकेबाद प्रतिदिन नीचे लिखे मन्त्र की एक माला जाप करे:-ऊँ गं गणपतये नमःजप के लिए लाल रंग का आसन प्रयोग करें |पूजन लाभ:आपके सभी प्रकार के रोगों का नाश होगा, सौभाग्य में वृद्धिहोगी, चेहरे पर तेज, कांति व चमक शोभायमान होती है। साथ हीसाथ यदि किसी भी तरह का वशीकरण या फिर तांत्रिक प्रयोगकिया हुआ हो तो उसका भी नाश होकर परिवार में सुख-समृद्धिव शांति का वास होकर माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद सदैव के लिएबना रहता है। ऐसा करने से आपके घर में हमेश के लिए गणपति कीअसीम कृपा के साथ-साथ रिद्धि-सिद्धि का वास होगा।सहित॥3….दक्षिणाव्रती शंख :-एक समुंदरी-जीव होता है इसका अस्थि- निर्मित खोल ही “शख”कहलाता हैl इसे बहुत पवित्र, विष्णु -प्रिय और लक्ष्मी -सहोदरमाना जाता है l यह देव-प्रतिमा कि भांति पूज्य होता है lसामंत्ये सभी शंख वाममुखी होती है l उनकी पूजा का फलसामान्य कहा गया है l किन्तु कुश शंख (जाति- विशेस के)वाममुखी न होकर, दक्ष्णिमुखी होते है l ये विशेस पवित्र , प्रभावी, शुभ और सिधिप्रद कहे गए है l कदाचित अपने इन्ही गुणोंके कारण ये दुर्लभ होते है l ऐसा शंख प्रयाप्त हो जाने पर उसकीपूजा अवश्य करनी चाहिए lमान्यता है कि जिस घर मे दक्ष्णिवर्ती शंख रहता है , वहा श्री-समृधि भी अवशय होती है l यदि कही मिल जाए (शंख टुटा- फुटा , विकृत नहीं होना चाहिए l ) तो उसे लाकर किसी शुभ- मुहूर्त मेपंचामृत, दूध, गंगाजल, अथवा सादे शुद्ध जल से स्नान कराकर धुप-दीप से पूजाकरके चांदी के आसान पर प्रतिस्ष्ट करना चाहिए lदैनिक-पूजा के रूप मे उसे धुप-दीप रहने से लक्ष्मी जी कृपा अवश्यप्रयाप्त होती है l4.….सियार सिंगी:-सामान्तया इसे गीदड़ -सिंगी अथवा सियार सिंगी कहते है lसियार एक वन्य-जीव है l इसके सिंग नहीं होती, पर अपवाद-स्वरूपकिसी – किसी के शरीर मे अचानक से उभर आती है उस समय वहपीड़ा से चिललाता है, शिकारी ऐसे समय मे उसे पहचान कर उसेमार देते है और सियार सिंगी को काट लेते है आकार मे यह छोटी -बड़ी चपटी- गोल किसी भी तरह कि ही सकती हैl मगर आवले सेजायदा बड़ी नहीं होती है l यदि किसी को मिल जाए तो इसेशुभ नक्षत्र मे विधि विधान से पूराकरके सिद्धि कर लेनी चाहिए lकहा जाता है कि यदि इसे हत्या के साथ रखा जाए तो यह बहुतशक्तिशाली ही जाती है lधन-सम्पति, वशीकरण, शत्रु शमन मे व्यक्ति सशक्त ही जाता है lजिस व्यक्ति के पास यह होती है l उसे किसी बात कि कमी नहींहोती l उसकी सारी इछचाये अपने आप पूरी हो जाती है lसियार सिंगी से धन प्राप्तिअगर व्यापार न चल पा रह हो यां जीवन में उन्नति न हो पा रहीहो तो इस साधना को करना चाहिए. कई बार इर्षा के कारण कुछलोग तंत्र प्रयोग कर देते हैं जिससे दूकान में ग्राहक नहीं आते यांकार्य सफल नहीं होते. इन परस्थितियों में भी यह प्रयोग रामबाण की तरह असर करता है. बुधवार के दिन सियार सिंगी कोकिसी स्टील की प्लेट में स्थापित कर दें . इसपर कुमकुम या केसरका तिलक लगाये. फिर इसपर चावल और फूल अर्पित करें और निम्नमंत्र का जप आसन में बैठ कर करें.ॐ नमो भगवती पद्मा श्रीम ॐ हरीम, पूर्व दक्षिण उत्तर पश्चिमधन द्रव्य आवे , सर्व जन्य वश्य कुरु कुरु नमःइस मंत्र का मात्र १०८ बार जप २१ दिन इस सियार सिंगी केसामने करें . २१ दिन के बाद इसको किसी डिब्बी में संभल कर रखले. अगर दूकान न चल रही हो तो दूकान में किसी सुरक्षित स्थल मेंरख दे और केवल २१ बार इस मंत्र का उच्चारण करें . इस पाधना कोकरने वाले को कभी धन की याचना नहीं करनी पार्टी अपितु धनउसकी और स्वयं ही आकर्षित होता रहता ह। उपरोक्त चारो दिव्य वस्तुए असली और सिद्ध मात्र पाने के लिए सम्पर्क करे:-
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