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Founded in year 1975 by Pandit Devi Lal ji Joshi in Rajhasthan & Gujrat, Astrology blends science and intuition, magic and mathematics, cycles and symbols. It focuses on planets and their seasons, and planets are real. .Your astrology chart or your horoscope is your personal map, calculated using the date and time you were born from the perspective of your birth location. Best Astrologer In Indore || Astrologer In India || Online Astrologer In Indore || Online Astrologer In India || Astrologer In Indore || Astrologer In India || Best Astrologer In Indore || Best Astrologer In India || No. 1 Astrologer In Indore || No. 1 Astrologer In India || Vedic Astrologer In Indore || Vedic Astrologer In India || India || n Astrologer In Indore || India || Best Astrologer In India || Love Astrologer In Indore || Love Astrologer In India || Top Astrologer In Indore || Top Astrologer In India || Famous Astrologer In Indore || Famous Astrologer In India || World Famous Astrologer In Indore || World Famous Astrologer In India || Best Love Problem Astrologer In Indore || Best Love Problem Astrologer In India ||

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जन्मपत्रिका में राहु -केतु द्वारा निर्मित शुभाशुभ योग (1) अष्ट लक्ष्मी योग जन्मांग में राहु छठे स्थान में और वृहस्पति केंद्र में हो तो अष्ट लक्ष्मी योग बनता हैं। इस योग के कारण जातक धनवान होता हैं और उसका जीवन सुख शांति के साथ व्यतीत होता हैं। (2) मोक्ष योग जन्मांग में वृहस्पति और केतु का युति दृष्टि सम्बन्ध हो तो मोक्ष योग होता हैं। यदि केतु गुरु की राशी और वृहस्पति उच्च राशी कर्क में हो तो मोक्ष की सम्भावना बढ़ जाती हैं। (3) परिभाषा योग तीसरे छठे, दसवे या ग्यारहवे भाव में राहु शुभ होकर स्थित हो तो परिभाषा योग का निर्माण करता हैं। ऐसा राहु जातक को कई प्रकार की परेशानियों से बचा लेता हैं। इनमे स्थित राहु दुसरे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम करता हैं। (4) अरिष्ट भंग योग मेष , वृष या कर्क लग्न में राहु नवम, दशम या एकादश भाव में स्थित हो तो अरिष्ट भंग योग बनता हैं जो अपने नाम के अनुसार ही कई प्रकार के अरिष्टो का नाश करता हैं। (5) लग्न कारक योग यदि लग्नेश अपनी उच्च राशी या स्वराशी में हो और राहु लग्नेश की राशी में स्थित हो तो लग्न कारक योग बनता हैं। यह योग भी जातक को शुभ फल प्रदान करता हैं। (6) कपट योग जन्मांग में चौथे भाव में शनि और बारहवे भाव में राहु हो तो कपट योग बनता हैं ऐसे जातक पर विश्वास सोच समझकर करना चाहिए। (7) पिशाच योग लग्न में चन्द्र और राहु स्थित हो तो पिशाच योग बनता हैं। ऐसे जातको को नजर दोष , तंत्र कर्म , उपरी बाधा के कारण परेशानी होती हैं इन्हे योग्य ज्योतिषाचार्य का परामर्श अवश्य समय रहते प्राप्त कर लेना चाहिए। (8) काल सर्प योग जब राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाये तो काल सर्प योग बनता हैं। यह योग ज्यादातर कष्ट कारक होता हैं २० प्रतिशत यह योग विशेष ग्रह स्थितियों के कारण शुभ फल भी देता हैं। (9) चन्द्र ग्रहण योग होने पर चन्द्र मन और कल्पना का कारक होकर पीड़ित होता हैं तब जातक का मन किसी कार्य में नहीलगेगा तो पतन निश्चित हैं ऐसे जातक मानसिक रोग, पागलपन के शिकार भी होते हैं। सूर्य ग्रहण होने पर जातक आत्मिक रूप से परेशां रहता हैं। जातक को राजकीय सेवा में परेशानी रहती हैं और जातक को पिता की तरफ से भी परेशानी रहती हैं। (10) मंगल राहु का योग जातक की तर्क शक्ति प्रभावित रहती हैं। ऐसा जातक आलसी भी होता हैं जिससे प्रगति नही कर पाता ऐसा जातक हिंसक भी होता हैं अपने क्रोध पर ये नियंत्रण नही कर पाते इनमे वासना भी अधिक रहती हैं। (11) बुध राहु का योग जड़त्व योग का निर्माण होता हैं यदि बुध कमजोर भी हो तो बोध्धिक कमजोरी के कारण प्रगति नही कर पायेगा इस योग वाला जातक सनकी , चालाक होता हैं कई बार ऐसे जातक भयंकर बीमारी से भी पीड़ित रहते हैं। (12) गुरु राहू चांडाल योग का निर्माण होता हैं। गुरु ज्ञान और पुण्य का कारक हैं। यदि जातक शुभ प्रारब्ध के कारण सक्षम होगा तो अज्ञान और पाप प्रभाव के कारण शुभ प्रारब्ध के फल को स्थिर नही रख पायेगा जातक में सात्विक भावना में कमी आ जाती हैं। (13) शुक्र राहू योग अमोत्वक योग का निर्माण होता हैं। शुक्र को प्रेम और लक्ष्मी का कारक माना जाता हैं। प्रेम में कमी और लक्ष्मी की कमी सभी असफलताओ का मूल हैं ऐसे जातक में चारित्रिक दोष भी रहता हैं। (14) शनि राहू योग नंदी योग बनता हैं। शनि राहू दोनों पृथकता करक ग्रह हैं। इसीलिए इनका प्रभाव जातक को निराशा की और ले जायेगा।
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🚩श्री गौरी-गणेशाय नम:🚩 ************************* 3 अगस्त 2020 दिन सोमवार को रक्षाबंधन पर 29 साल बाद बना है ऐसा शुभ संयोग, इस मुहूर्त में बांधें राखी ..... *जो भाई-बहन कोरोना के चलते इस बार दूर हैं, वो जल्दबाजी न करें, जहां हैं वहीं से रक्षाबंधन मनाएं। वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल के जरिए एक दूजे को देखें, दुआएं करें, लम्बी उम्र की मनोकामना करें। भाई-बहन के प्रेम उत्सव का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन का पर्व इस बार तीन अगस्त को कई शुभ संयोग में मनाया जाएगा। इस बार श्रावणी पूर्णिमा के साथ महीने का श्रावण नक्षत्र भी पड़ रहा है, इसलिए पर्व की शुभता और बढ़ जाती है। श्रावणी नक्षत्र का संयोग पूरे दिन रहेगा।* *29 साल बाद आया रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग :- इस साल सावन के आखिरी सोमवार यानी 3 अगस्त पर रक्षाबंधन का त्योहार पड़ रहा है। ज्योतिषियों के माध्यम से भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन इस बार बेहद खास होगा क्योंकि इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग बन रहा है। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है। साथ ही इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है।* *रक्षाबंधन पर बन रहे शुभ योग :- इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इसके पहले यह संयोग साल 1991 में बना था।* *इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके साथ ही शाम 7 बजकर 49 मिनट से दीर्घायु कारक आयुष्मान योग भी लग जाएगा।* *रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त देखें :~* *राखी बांधने का मुहूर्त - 09:27:30 से 21:11:21 तक।* *रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त- 13:45:16 से 16:23:16 तक।* *रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त- 19:01:15 से 21:11:21 तक।* *मुहूर्त अवधि: 11 घंटे 43 मिनट।* *अटूट रिश्ते का इतिहास :~ धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिशुपाल राजा का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण जी के बाएं हाथ से खून बहने लगा, तो द्रोपदी ने तत्काल अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ की अंगुली पर बांध दिया। कहा जाता है कि तभी से भगवान श्रीकृष्ण जी द्रोपदी को अपनी बहन मानने लगे और सालों के बाद जब पांडवों ने द्रोपदी को जुए में हरा दिया और भरी सभा में जब दुशासन द्रोपदी का चीरहरण करने लगा तो भगवान श्रीकृष्ण जी ने भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी लाज बचाई थी।* *मान्यता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा, जो आज भी जारी है। श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है।* *पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की बहन ने भद्रा में उसे रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था। इसलिए भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित है।* *आप सभी को सहपरिवार सहित मङ्गलमय रक्षाबन्धन पर्व की बधाई एवं अनन्त हार्दिक शुभकामनाएं हों।* !! जय जय श्रीकृष्ण !
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